शनिवार, 14 जनवरी 2017

THE ONE YOU CANNOT HAVE : व्योमेश चित्रवंश की डायरी, 13/14जनवरी 2017

The One You Cannot Have

      Tonight is so chilled, the temperature of outside of my room is not more then 7 degree centi. I watched its 12.40 midnight and i just completed Preety Shenoy ' s THE ONE YOU CANNOT HAVE.  Its a very simple emotional story which all about the college life love and family pressure of indian families.
      How long does it take to heal a broken heart? Can you ever forget that one perfect relationship you had? Anjali knows who she wants, she wants Aman. Aman too knows who he wants, he wants Shruti. Shruti and Aman were once inseparable. Theirs was a love that would last forever and more. Then, out of the blue, Shruti left Aman. A devastated Aman moved abroad in the hope of forgetting Shruti and to heal. Shruti married Rishabh. Now Aman is back in India and looking for a fresh start. But he is still haunted by memories of his love. Can he ever break free from it? His head tells him to move on, to find love with Anjali, but his heart wont listen. No matter what he does, Shrutis shadow looms large. Can there be a happily-ever-after for any of them? A straight-from-the-heart modern-day romance of unrequited love, of complicated relationships and about moving on when you realise that there will always be the one you cannot have.
Preety' s writing style is good which is  simple and hearttouching. The theam problem of novel indicated so nearer and dearer story which relates everyone. For timepass and emotional mood it is a great story.
(Banaras, 13/14 january 2017, 12.36 pm.)
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

मुझे फर्क नही पड़ता : व्योमेश चित्रवंश की डायरी, 13 जनवरी, 2017, शुक्रवार

मुझे फर्क नही पड़ता : व्योमेश चित्रवंश की डायरी, 13 जनवरी, 2017, शुक्रवार
( सोशल मीडिया पर मिली एक पोस्ट, जो मन के बड़ी करीब लगी)

              भारत में बहुत से लोग है, जो कथित भांड पत्रकारों, और भ्रस्ट नेताओं की बातों में आकर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते है
अच्छा है, लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये तो आपका अपना हक है
पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हो ?

क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया, पप्पू, केजरीवाल, ममाता बनर्जी, वामपंथी
ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर है, या इनका रिकॉर्ड बेहतर है

* क्या नरेन्द्र मोदी से बेहतर मुख्यमंत्री है ममाता बनर्जी, बेहतर दिखती है तो कोल्कता में और गुजरात के किसी छोटे शहर भी जाकर 1 नजर मार लीजिये

* लालू और मुलायम, दोनों के घर की ऐसी स्तिथि थी की, 1 के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे, 
जाति के नाम पर चलने वाले नेता, आज अरबपति है,
रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमता है, तो शिवपाल महँगी ऑडी, ये लोग नरेन्द्र मोदी से
बेहतर है ?

* एक रेस्तरां/बार में काम करने वाली और उसके  बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल तो इनका हाल में ही राज बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर है

* 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ?

* 5 साल केजरीवाल, 5 साल केजरीवाल, का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चुना लगाने वाला, 5 दिन भी दिल्ली में नहीं रहता, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कुल क्या ये कुकुरमुत्ता नरेंद्र मोदी से बेहतर है ?

* जब मायावती राजनीती करने निकली थी, और कांशीराम की पिछलगू थी, तब उसके घर में दिया जलने का धन नहीं था, आज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास 497 कंपनिया है, क्या मायावती नरेंद्र मोदी से बेहतर है ???

अरे मोदी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किनका करते हो, तुम्हे कोई शर्म है ?

थोड़ा सोचो, देश को और कितने टुकड़े में देखना है, कितना बर्बाद करवाना है ?
अब तो शर्म करो। कितना लूटना है ?

मान लो की मैं मूर्ख हूँ और

● मुझे नहीं मालूम कि मैं मोदी जी को क्यों पसंद करता हु । लेकिन मेरे पास कोंग्रेस , सपा ,बसपा , आप को नापसंद करने के बहुत कारण है ।

● मुझे नहीं मालूम कि अच्छे दिन आएंगे कि नहीं, पर मोदी जी के अतरिक्त और कोई राजनेता दूर दूर तक दिखाई नहीं देता जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो

● मुझे ये भी नहीं मालूम कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेगे या नहीं । लेकिन, इसका पूरा यकीन हैं, उनके खून का एक एक कतरा  भारत माता को पुनः विस्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत है ।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोदी के पास 56 इंच का सीना हैं या नहीं। लेकिन ये पता हैं कि उनके सीने में 'दम' हैं 'दमा '(कुकुखॉसी) नहीं।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मोदी से देश के कुछ बुद्धि जीवी नाराज है क्यूंकि मुझे यकीन है, उनके आने के बाद युवा पीढ़ी बहुत खुश है

● मुझे ज्ञात नहीं कि मोदी देश का कितना विकास कर पाएंगे, लेकिन मुझे यकीं है वो अपनी जिम्मेवारियां उठाने में कोई कसर बाकि नहीं रखेंगे।

● मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी हैं या नहीं। मुझे पक्का यकीन हैं उनके पास भविष्य की पूरी तैयारी है ।

● हां बाकई मुझे नहीं पता कि नोटबंदी कारण भविष्य में बीजेपी हारेगी या जीतेगी पर एक चार्टर्ड अधिवक्ता और देश का सजग नागरिक  विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि मेरा देश जीत गया ।
(बनारस, 13 जनवरी, 2017, शुक्रवार )
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रविवार, 8 जनवरी 2017

जीवन जीने का ढंग सीखाती एक कविता : व्योमेश चित्रवंश की डायरी, 08 जनवरी 2017, रविवार

जीवन का एक सच जो हम स्वीकार नही करते या जानबूझ कर उस वास्तविक सच को जीवन भर झुठलाते है. और जीवन रोजमर्रा  के आपाधापी मे वास्तविक जीवन को जीना भूल जाते है . लिहाजा हम धीरे धीरे मरने लगते है. बावजूद इसके दुर्भाग्यत: हम जीना नही सीख पाते.
नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता  "You  Start  Dying  Slowly" जो मुझे बेहद पसंद है. प्राय: जब अनायास के भागदौड. व्यस्तता व तनाव से मेरा सामना पडता  है तो यह कविता मुझे बहुत सूकून देती है. इस कविता का हिन्दी अनुवाद भी बेहद सरल व सहज है. कविता का हिन्दी अनुवाद...

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :
- करते नहीं कोई यात्रा,
- पढ़ते नहीं कोई किताब,
- सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
- करते नहीं किसी की तारीफ़।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, जब आप :
- मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
- नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :
- बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
- चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
- नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,
- नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या
- आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :
- नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :
- नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
- अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
- अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
- अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की...।
*तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं...!!!*
( बनारस, 08जनवरी2017, रविवार)
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